Tuesday, December 4, 2012

कभी-कभी


चंद लम्हो से मिनट , मिनट से घंटे
घंटो से तर-बतर पल-पल दिन  जया करते है

कभी-कभी हम किसी एक को याद रखने मे
किसी ओर को भी तो भूल जया करते है

गर्मी सर्दी वर्षा बसंत बहार
हर साल ये जरूर आया करते है

मोसम तो आते जाते रहते जानी
लेकिन सायद ही कभी भूले याद आया करते है

ये तो जालिम जमाने का दोष है भाई
हम तो  बहुत याद करने की कोशिश करते

कभी-कभी तो पास आ कर ठहर जाया करते है
क्या करे हर बार ये कमबख्त काम आ जया करते है

बहाने नहीं है ये दोस्त मेरे सच है
जिंदगी के सफर में कभी-क भूले बिसरे भी याद आया करते है

1 comment:

मदन मोहन सक्सेना said...

बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/
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