Wednesday, October 19, 2011

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: खूब चलता है ब्लॉग जगत में औरत और मर्द का भेद भाव

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: खूब चलता है ब्लॉग जगत में औरत और मर्द का भेद भाव: खूब चलता है ब्लॉग जगत में औरत और मर्द का भेद भाव आप भाई बंधुओ को ये पोस्ट पड़ कर अच्छा और बुरा दोनों तरह का विचार आये गा पे क्या करू मैं ये...

14 comments:

आशा जोगळेकर said...

आपकी ये कविता तो नारी के मन के भावों को ही उजागर कर रही है । सुंदर कविता (गज़ल ) ।

V.P. Singh Rajput said...
This comment has been removed by the author.
ITIKA RAJPUROHIT said...

BHUT BADIYA PRSTUTI PER BADHIYA.

Babli said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! सटीक प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

NISHA MAHARANA said...

दिल के हाथों आज भी मजबूर हैं तो क्या हुआ
मुश्किलों के दौर में हम हौसला रखते रहे.
बहुत सुन्दर.

Anonymous said...

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pragya said...

हमको अपने आप पर इतना भरोसा था कि हम
चैन खोकर भी हमेशा चैन से रहते रहे...बेहतरीन..

मनोज कुमार said...

एक अच्छी पोस्ट का लिंक दिया है आपने।

S.N SHUKLA said...

हमको अपने आप पर इतना भरोसा था कि हम
चैन खोकर भी हमेशा चैन से रहते रहे

चाँद सूरज को भी हमसे रश्क होता था कभी
इसलिए कि हम उजाला हर तरफ़ करते रहे


बहुत ख़ूबसूरत रचना, बधाई.

कृपया मेरे ब्लॉग प् भी पधारने का कष्ट करें.

V.P. Singh Rajput said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
मेरा शौक
मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है
आज रिश्ता सब का पैसे से

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग said...

Bahut Khoob.

amrendra "amar" said...

बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

Mamta Bajpai said...

बहुत संदर

दिगम्बर नासवा said...

अच्छा लिंक दिया है ...

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